Wednesday, 12 June 2019

“ Khoon ka Karz ”- by Surendra Singh and Sunil Kumar


Due to cut-throat competition in every field of life the huge size of the families has become a curse." KHOON KA KARZ" is a story of poor large Muslim family where every family member is deprived with fundamental felt needs of life ROTI KAPDA AUR MAKAN. The head and earner of the family struggles throughout his life for earning bread and butter for his family and dies prematurely. In his absence survivors of the family are forced to live a miserable life. One grieving Hindu friend of deceased comes forward to take care of this poor family and forces the Govt. to make the two children norm to regulate the population of the country, increasing by leap and bound.

SHOP ON:  Amazon  Flipkart  Shopclues  Bluerose


“Safar Zindagi Ka” By Rakesh Rahi




लेखक राकेश कुमार “राही” गोण्डा के ग्राम आनंदपुर (सिंघवापुर) ग्रामीण पृष्ठ भूमि मे जन्मे बहुआयामीव्यक्तित्व के धनी है। लेखक कविता, कहानिया व उपन्यास लेखन व पाठन मे रुचि रखते है तथा लेखक द्वारा कई सामाजिक कहानिया व कविताए लिखी गयी है।

यह कहानी दोस्ती और प्रेम पर आधारित है जिसमे लेखक ने दो दोस्तो के त्याग और समर्पण के बारे मे लिखा है।

“Violet Lau” By Elizabeth Clare Prophet

‘‘वाॅयलेट लौ ऐसी रोशनी है जो कि प्रत्येक धर्म और भक्ति धारा के लिए उपयुक्त है। यह सभी को एक समान सम्मान प्रदान करती है। यह एक दूसरे से मिलने का साधन है…. यह वह शक्ति है जो आपको सशक्त बनाती हैं‘‘। - डेनइन ब्रिंकलेय, लेखक, सेव्ड बाई द लाईट - क्ंददपवद ठतपदासमलए ंनजीवत व िैंअमक इल जीम स्पहीज बीसवीं शताब्दी के बहुचर्चित संत एडगर केसी ;म्कहंत ब्ंलबमद्ध ने वाॅयलेट लौ की चमत्कारिक स्वाभाविक चिकित्सा प्रदान करने की शक्ति को पहचाना। डैनइन ब्रिंकलेय ने अपनी मृत्यु के बहुत समीप जाकर लौट आने के अनुभव के दौरान वाॅयलेट लौ को देखा। वर्षों से चिकित्सक और रसायन शास्त्री वाॅयलेट लौ का प्रयोग शरीर के भौतिक और मानसिक इलाज के लिए कर रहे हैं। ऐसा करने से शरीर को उसकी प्राकृतिक और रोगमुक्त अवस्था में लाया जा सकता है। इस पुस्तक में दी गई व्यवहारिक तकनीक के द्वारा आप अपने तन के समस्त रोगों का भली-भांति इलाज कर सकते हैं। ये सभी तकनीकें अपनाकर आप अपने में प्राकृतिक सामंजस्य और संतुलन बना सकते हैं जो कि हर प्रकार से आपको स्वस्थ रखेगा, शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक तौर पर।
Shop on Amazon Flipkart ShopClues and BlueRose

“ Media Imperialism and Indian television industry " – by Dr. Meenakshi


This book is an effort to comprehend the present media landscape. The present human race is living in the era of a networked society where media is playing a pivotal role in shaping and modifying society. After 1991, India opened its doors to foreign companies for them to operate their businesses in India. Under the ownership of foreign companies, multiple media platforms started, especially in the domain of television, which transformed not only The Indian television industry but also impacted Indian culture.


“Jharte Palaash” By Sangeeta Srivastava

कुछ तो दर्द़ -ए -दिल जवां
दिल को सोचे दिल जवां ।
एहसासों की है ज़मीं 
जज़्बातों का आसमां ।
‘झरते पलाश’ सहजता से जीवन के विभिन्न स्वरुपों में यथार्थ के भूतल पर स्व स्फूर्त झरना है । कड़कती धूप में जब छांव भी अपने लिए कुछ ठंडक की तलाश करती है , फूल खिलते हैं मुस्कुराकर उसी तपिश में । वो जानते हैं कि शाम तक मरझा जाएंगे मगर वो खिलखिलाना नहीं छोड़ते।
कवियtri संगीता shrivastava का ये काव्य sangrah 
वस्तुत: उनके तख़ल्लुस “कसक” को पूर्णत: एवं सच्चे रुप में 
परिभाषित करता है । जिसमें अधूरेपन की एक टीस है तो 
कहीं कुछ दर्द़ मीठे से एहसास हैं। ‘झरते पलाश’ खुले आकाश से रुबरु होती है। एक ताज़गी भरा हवा का झोंका है । जहां कभी भावनाओं में बेरुख़ी पतझड़ बन जाती है और फिर मन के अंदर घुमड़ता बादल ही मौसम की हरियाली हो आता है।
फ़िज़ा के साथ अपने भीतर ही जब जज़्बातों का सावन भीग जाता है , तब पलाश के पेड़ और फूल की रंगत कुछ और नज़र आती है। ये कविताएं शब्दों में बंधती कभी चलचिtra सी सामने आ जाती हैं । जिंदगी का रोना , हंसना , टूटना , बिखरना और संवरना मानो सब साथ गुनगुनाती हैं । उदास से चेहरे पर अचानक खिलती मुस्कान सचमुच मोहक लगती है ।
जब संवेदनाओं , भावनाओं के तूफ़ान की तीवता पचण्ड हो , कवियtri जैसे अपने स्वभाव से परिचित कराती है। अनुभव ही कविताओं की आत्मा में बस जाते हैं। झरते पलाश की कविता ज़िंदगी को इत्तेफ़ाक कहती है मगर खुशी को इत्तेफाक नहीं मानती ।
कुछ इस तरह …….
ज़िंदगी कुछ अजीब , इत्तेफ़ाक करती है
कभी घात ये कभी , पतिघात करती है ।
इक़ पल में आबाद , दूजे पल बर्बाद करती है
ज़िंदगी खुद जवाब कभी , खुद ही सवाल करती है ।
Shop on Amazon ShopClues and BlueRose

“ Aaj Mere Desh Ko Subash Chahiye “- by Tejendra Pal Tyagi


नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर के खचा-खच भरे केथे हॉल में आधी रात को ब्रिटेन और अमेरिका के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की थी और आजाद हिन्द सरकार का गठन किया था, जिसके पहले प्रधानमंत्री वह स्वयं थे। आजाद हिन्द सरकार को 10 दिनों में 11 देशो ने मान्यता दे दी थी, जिसमें रूस और जर्मनी भी शामिल थे।
भारत की आजादी का आगाज सबसे पहले तब हुआ जब नेताजी ने अंडमान और निकोबार आइलैंड के रोज आइलैंड में 30 दिसम्बर 1943 को तिरंगा झंडा फ़हराया और लेफ्टिनेंट कर्नल लौंगनाथन को वहाँ का लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया। 14 अप्रैल 1944 को मणिपुर के मोइरेंग में तिरंगा झंडा फहराया गया। नागालैंड और कोहिमा के क्षेत्र में 4 महीने तक आजाद हिन्द सरकार की हुकूमत चली। यहाँ के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे लेफ्टिनेंट कर्नल चटर्जी। इसके बाद यदि इम्फाल की लड़ाई के समय कांग्रेस को रसद देने की बजाय आजाद हिन्द सरकार को भारतीय नेताओं ने समर्थन दे दिया होता तो पूरा देश तभी आजाद हो गया होता। सच्चा इतिहास गवाह है कि जैसी भी आजादी मिली वो भी अंततोगत्वा नेताजी के व्यक्तित्व और आजाद हिन्द फौज की कुर्बानियों के कारण मुंबई में तलवार नामक जहाज के नोसैनिकों के 18 फरवरी 1946 के विद्रोह के कारण मिली। आन्दोलनों के कारण आजादी मिलनी होती तो तब मिल गई होती जब आन्दोलन चलाए गए थे। सारे आन्दोलन 1942 तक खत्म हो चुके थे। 5 वर्ष के बाद 1947 में भारत को मिला डोमिनियम स्टेट्स भी केवल और केवल नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की प्रेरणा और आजाद हिन्द फौज की कुर्बानियों को जाता है। आजाद हिन्द फौज के 70 हजार सिपाहियों में से 26 हजार ने शहादत दी थी। दुनिया में ऐसी कोई सेना नहीं है जिसने किसी युद्ध में अपने 44% सिपाहियों की शहादत दी हो।
आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों को पानी के तीन जहाजों में करांची, मुंबई और विशाखापट्नम लाया गया था। करांची में लाये गये आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों को पाकिस्तान की सेना में मिला लिया गया जिनमें हबीबुर रहमान भी शामिल थे। तत्कालीन सरकारों का अत्यंत ओछापन था कि आजाद हिन्द फौज के एक भी सिपाही को हिन्दुस्तान की सेना में स्थान नहीं दिया गया। क्यों ? इतिहास को पुनः लिखे जाने की आवश्यकता है।



"MODI AVAM YUG PARIVARTAN” By MAHAVIR SINGH SAINI

This book “Modi Avam yug parivartan” is based on Modi’s positive power and wisdom, the book shows that everyone should think positive and how a positive personality can change the world.+

My name is Mahavir Singh Saini my birthplace is village Luhari, district baghpat Uttar Pradesh. I was born on 9th November 1958 in a farmers family, I did my education in baghpat. Writing is my passion and it is a god gift that I have.

Shop on Amazon Flipkart ShopClues and BlueRose